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Bihar Development Projects: बिहार की जल परियोजनाओं के लिए केंद्र से 11 हजार करोड़ की मांग, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई पर जोर

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल प्रबंधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्र से करीब 11 हजार करोड़ रुपये की मदद मांगी है।

पटना, 1 सितंबर। बिहार में हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने और लंबे समय से अटकी जल परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र के सामने बड़ा वित्तीय प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार से करीब 11 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी है। यह राशि बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल प्रबंधन और नदी आधारित विभिन्न परियोजनाओं में खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ बैठक के दौरान बिहार की प्रमुख जल परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया। बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। चर्चा में राज्य की लंबित योजनाओं को गति देने के साथ नई परियोजनाओं के लिए केंद्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

कोसी-मेची लिंक परियोजना की धीमी रफ्तार पर चिंता

बैठक में कोसी-मेची लिंक परियोजना प्रमुख मुद्दों में रही। इस परियोजना के पहले चरण की अनुमानित लागत करीब 3,652.56 करोड़ रुपये बताई गई है। पहले चरण के लिए 965.41 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, लेकिन अब तक सिर्फ करीब 156.745 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।

राज्य सरकार ने केंद्र से शेष राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया है। साथ ही परियोजना के दूसरे चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR को मंजूरी देने का अनुरोध भी किया गया है।

कोसी और उत्तर बिहार की अन्य नदियों से जुड़े क्षेत्रों में बाढ़ का असर कम करने के लिहाज से इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का जोर है कि वित्तीय अड़चनों के कारण महत्वपूर्ण योजनाओं की रफ्तार प्रभावित नहीं हो।

पश्चिमी कोसी नहर परियोजना भी एजेंडे में

बैठक में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए केंद्रीय सहयोग का मुद्दा भी सामने आया। इसका DPR करीब 8,338.89 करोड़ रुपये का बताया गया है। परियोजना के पहले चरण पर बिहार सरकार अपने संसाधनों से काम शुरू कर चुकी है।

राज्य सरकार चाहती है कि इस परियोजना समेत बिहार की अन्य महत्वपूर्ण जल योजनाओं को भी केंद्र से आवश्यक आर्थिक सहयोग मिले। इससे सिंचाई क्षमता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं को केंद्रीय बजट में जगह देने की मांग

बिहार सरकार ने कुछ अन्य बड़ी परियोजनाओं को केंद्रीय बजट में शामिल करने का आग्रह किया है। इनमें इंद्रपुरी जलाशय योजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक और सारण बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी परियोजना शामिल हैं।

इन योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में जल प्रबंधन को बेहतर करना, सिंचाई सुविधा बढ़ाना और बाढ़ के पानी की निकासी की समस्या को कम करना है।

नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं को गति देने की कोशिश

बिहार की बाढ़ समस्या का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी नेपाल से आने वाली नदियों से जुड़ा है। इसी वजह से बैठक में कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना का मुद्दा भी उठाया गया।

राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं से संबंधित सर्वेक्षण और DPR तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया। बिहार का तर्क है कि सीमा पार से आने वाली नदियों के कारण पैदा होने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान केवल राज्य स्तर पर किए जाने वाले उपायों से संभव नहीं है।

बांग्लादेश जल समझौते पर बिहार के हित की बात

जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों के संदर्भ में भी बिहार सरकार ने अपना पक्ष रखा। बांग्लादेश के साथ जल समझौते के नवीनीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने साथ ही राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने की जरूरत भी बताई। नदियों में जमा होने वाली गाद बिहार की बाढ़ समस्या को गंभीर बनाने वाले कारकों में शामिल है। गाद प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट नीति होने से नदी की क्षमता और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।

FMBAP के तहत बिहार का बजट बढ़ाने की मांग

मुख्यमंत्री ने Flood Management and Border Areas Programme (FMBAP) के तहत बिहार के लिए केंद्रीय बजटीय प्रावधान बढ़ाने पर भी जोर दिया।

राज्य सरकार का कहना है कि बिहार देश के प्रमुख बाढ़ प्रभावित राज्यों में शामिल है। राज्य का करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ के प्रभाव में आता है। गंगा, कोसी, बागमती समेत कई नदियों के कारण हर वर्ष बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र प्रभावित होते हैं।

ऐसे में बिहार सरकार का जोर है कि बाढ़ नियंत्रण के लिए उपलब्ध केंद्रीय सहायता राज्य की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बढ़ाई जाए।

सिर्फ राहत नहीं, स्थायी समाधान पर जोर

बिहार में बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव अभियान चलाना हर साल की प्रक्रिया बन चुकी है। लेकिन राज्य सरकार अब बाढ़ से होने वाले नुकसान को केवल राहत पैकेज के जरिए संभालने के बजाय दीर्घकालिक जल प्रबंधन पर जोर दे रही है।

नदियों के जलस्तर, सिंचाई, जल निकासी, तटबंध और सीमा पार से आने वाले पानी से जुड़े मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। ऐसे में एक परियोजना के बजाय कई योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।

केंद्र से करीब 11 हजार करोड़ रुपये की मांग इसी व्यापक जल प्रबंधन रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है। अब इन प्रस्तावों पर केंद्र की ओर से वित्तीय मंजूरी और परियोजनाओं की प्रगति को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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बिहार में बाढ़ और नदियों के जलस्तर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Alam Ki Khabar पढ़ते रहें।

बाढ़ से स्थायी सुरक्षा के लिए लंबी योजना जरूरी

बिहार की बाढ़ समस्या किसी एक मौसम या एक नदी तक सीमित नहीं है। मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों का दबाव, गाद का जमाव, तटबंधों पर दबाव और जल निकासी की समस्या कई जिलों में एक साथ चुनौती पैदा करती है। हर साल राहत और पुनर्वास पर बड़ी राशि खर्च होती है, लेकिन बाढ़ का स्थायी समाधान अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

ऐसे में जल परियोजनाओं के लिए केंद्र से मांगी गई बड़ी राशि को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। परियोजनाओं की गुणवत्ता, समयसीमा और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। जिन योजनाओं का DPR तैयार है, उन्हें वर्षों तक मंजूरी या फंड की प्रतीक्षा में नहीं रहना चाहिए।

कोसी-मेची लिंक, पश्चिमी कोसी नहर और नेपाल से संबंधित परियोजनाओं की प्रगति का सीधा असर लाखों लोगों की जिंदगी और कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के साथ इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है, तो बिहार की बाढ़ और सिंचाई दोनों समस्याओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव संभव है।

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